* के.यो.प्रा.चि.अ.प. में 'प्रशासनिक-सह-लेखा अधिकारी' के पद की रिक्ति के लिए विस्तृत सूचना/विज्ञापन https://naturopathyday.in/vac.php |* अनुसंधान अधिकारी (योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा) पद के साक्षात्कार हेतु अभ्यर्थियों के प्रवेश के लिए स्क्रीनिंग कमेटी का निर्णय www.naturopathyday.in/result.php | * सीधी भर्ती के लिए अधिसूचना दिनांक 15.01.2024 का परिणाम। www.naturopathyday.in/result.php | * के.यो.प्रा.चि.अ.प. - हेल्पलाइन नंबर : 011-45649868 और ईमेल आईडी: ccryn.nielitrecruitment@gmail.com | * के.यो.प्रा.चि.अ.सं., देवरखाना, झज्जर, हरियाणा और के.यो.प्रा.चि.अ.सं., नागमंगला तालुक, मांड्या जिला, कर्नाटक में आईपीडी और ओपीडी योग और प्राकृतिक चिकित्सा सेवाएं शुरू की गई हैं।| * योगाटेक चैलेंज 2024 संबंध में विस्तृत एवं अन्य जानकारी देने की तारीखhttps://naturopathyday.in/announce.php | * योगाटेक चैलेंज 2024 का परिणाम.https://naturopathyday.in/result.php
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राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा सम्मेलन

प्राकृतिक चिकित्सा पर राष्ट्रीय सम्मेलन

प्राकृतिक चिकित्सा पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में केंद्रीय योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान परिषद् (के.यो.प्रा.चि.अ.प.) द्वारा किया जा रहा है। इस सम्मेलन का विषय, "स्वस्थ और बेहतर जीवन के लिए योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा", भारत के माननीय प्रधानमंत्री द्वारा दिये गए इस पुरजोर कथन का कि संतुलित आहार, शारीरिक गतिविधि और जीवन शैली प्रबंधन के माध्यम से मोटापे की रोकथाम की इस राष्ट्रीय प्राथमिकता के साथ मेल खाती है। यह सम्मेलन व्यक्तियों की पूर्ण स्वास्थ्य और वेलनेस को बढ़ावा देने और बनाए रखने में योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा पर आधारित जीवन शैली की महत्वपूर्ण भूमिका पर ज़ोर देती है। यह राष्ट्रीय मंच चिकित्सा क्षेत्र के विद्वानों, अनुसंधानकर्ताओं विद्यार्थियों, और अलग-अलग क्षेत्र के उत्साही लोगों को एक साथ लाता है ताकि वे योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा में साक्ष्य आधारित प्रणालियों एवं विधियों पर चर्चा कर सकें, साझा कर सकें और उनके बारे में जान सकें। इसका उद्देश्य अंतरविषयक सहयोग को बढ़ावा देना, वैज्ञानिक समझ को आगे बढ़ाना, और समग्र स्वास्थ्य और खुशहाली को बढ़ावा देने के लिए पारंपरिक ज्ञान को पारंपरिक चिकित्सा पद्दतियों के साथ एकीकृत करना है।

प्राकृतिक चिकित्सा के बारे में

अभ्यास और प्रशिक्षण:
भारत में प्रति वर्ष 18 नवंबर को प्राकृतिक चिकित्सा दिवस मनाया जाता है ताकि प्राकृतिक चिकित्सा, जो कि औषध रहित एक उपचार प्रणाली है और इसके माध्यम से अच्छी शारीरिक एवं मानसिक सेहत को बढ़ावा दिया जा सके। इस तारीख का महत्व 18 नवंबर 1945 से जुड़ा है, जब महात्मा गांधी अखिल भारतीय प्राकृतिक चिकित्सा फाउंडेशन ट्रस्ट के जीवन प्रयन्त अध्यक्ष बने और उन्होंने समाज के सभी वर्गों तक प्राकृतिक चिकित्सा के उपचार के लाभों को पहुंचाने के उद्देश्य से ट्रस्ट डीड पर हस्ताक्षर किए थे। महात्मा गांधी को भारत में प्राकृतिक चिकित्सा का संस्थापक माना जाता है, क्योंकि उन्हीं के प्रयासों से यूरोप में शुरू हुई इस पद्धति को देश में व्यापक पहचान और लोकप्रियता मिली। इस ऐतिहासिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य महत्व को देखते हुए, प्राकृतिक चिकित्सा के निवारक, प्रोत्साहक और समग्र क्षमता के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए, भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने 18 नवंबर 2018 को आधिकारिक तौर पर प्राकृतिक चिकित्सा दिवस मनाने की घोषणा की। प्राकृतिक चिकित्सा दिवस पूरे देश में जागरूकता शिविर, कार्यशाला, संगोष्ठी और सम्मेलन के माध्यम से मनाया जाता है। कई प्राकृतिक चिकित्सा अस्पताल, संगठन और मेडिकल कॉलेज सप्ताह भर के कार्यक्रम और मेडिकल कैंप आयोजित करते हैं, जो आम जनता को शिक्षा और सेवाएँ देते हैं और समग्र स्वास्थ्य और वेलनेस के सिद्धांतों को बढ़ावा देते हैं। इस वर्ष केंद्रीय योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान परिषद् (के.यो.प्रा.चि.अ.प.), नई दिल्ली, 5 से 6 फरवरी 2026 के बीच केंद्रीय योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (के.यो.प्रा.चि.अ.सं.), झज्जर, हरियाणा में प्राकृतिक चिकित्सा पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन कर रही है। इस सम्मेलन का विषय, "स्वस्थ और बेहतर जीवन के लिए योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा", जो शारीरिक स्वस्थता, मानसिक सेहत, रोगों से बचाव और संपूर्ण स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा पर आधारित जीवनशैली की भूमिका पर ज़ोर देता है। यह सम्मेलन साक्ष्य -आधारित प्रणालियों एवं विधियों को दिखाने, अलग-अलग क्षेत्रों में अनुसंधान को बढ़ावा देने, संपूर्ण स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता बढ़ाने और लंबे समय तक सेहतमंद रहने के लिए टिकाऊ जीवनशैली अपनाने को प्रोत्साहित करने के लिए एक मंच प्रदान करेगी।

लक्षित दर्शक:

योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के चिकित्सकों, हितधारकों अनुसंधान कर्ताओं, छात्र और अलग-अलग क्षेत्रों के विद्वान।

सम्मेलन के उद्देश्य

1. रोगों की रोकथाम और स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में अनुसंधान- आधारित योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा की उपचार पद्दती के प्रयोग को बढ़ावा देना।
2. स्वस्थ जीवन जीने के लिए योग एवं नेचुरोपैथिक मेडिसिन में वैज्ञानिक साक्ष्यों और बेहतरीन तरीकों का प्रचार – प्रसार करना ।
3. योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में साक्ष्य आधारित चिकित्सीय अभ्यास को बेहतर बनाने के लिए शोधकर्ताओं, डॉक्टरों और शिक्षकों के बीच एकेडमिक आदान-प्रदान और इंटरडिसिप्लिनरी सहयोग को बढ़ावा
4. राष्ट्रीय स्तर पर योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा में भविष्य की अनुसंधान प्राथमिकताओं और नीति निर्धारक दिशाओं की पहचान